पंखा हूँ मैं पंखा सिर पटकूं क्या अपना? पंखा हूँ मैं पंखा सिर पटकूं क्या अपना?
इक दिन ऐसा आयेगा जब तुम बेबाक होकर मुस्कुराते हुए अपने सारे पलों को जिओगी... इक दिन ऐसा आयेगा जब तुम बेबाक होकर मुस्कुराते हुए अपने सारे पलों को जिओगी...
सबके कुछ अरमान है... सबके कुछ अरमान है...
मौत के साथ, जुदा हम होंगे, जाने कल कैसे, विदा हम होंगे। मौत के साथ, जुदा हम होंगे, जाने कल कैसे, विदा हम होंगे।
सजा तो हम काट लें ख़ुशी से पर, इस क़ैद की मुद्दत पता तो चले। सजा तो हम काट लें ख़ुशी से पर, इस क़ैद की मुद्दत पता तो चले।
सृजन...। सृजन...।